Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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दम घुटने लगा है
साँस ले रही है नफ़रतें अब खुली हवा में दम घुटने लगा है प्रेम का बंद कमरों में ~ मनीष शर्मा
दिल मेरा बेज़ुबान
दिल मेरा बेज़ुबान हैं लबों पे जड़ दिया मैंने जंगी ताला बयाँ करूँ जो हाल ए दिल मैं बागी करार दिया जाऊँगा ~ मनीष शर्मा
ज़रूरतों ने यायावर बना दिया
इक मुक्कम्मल ठिकाना, हमेशा चाहता रहा ये मन इक मुक्कम्मल ठिकाना, हमेशा ढूँढता रहा ये मन कमबख़्त ज़रूरतों ने यायावर बना दिया ~ मनीष शर्मा
मेरी अंगुलियाँ
ज़िंदगी तब बड़ी ही सुलझी-सुलझी हुई सी लगती थी तुम्हारी उलझी ज़ुल्फों को जब सुलझाती थीं, मेरी अंगुलियाँ ~ मनीष शर्मा
मेरे दिल के फ़लक पे
मेरे दिल के फ़लक पे इक चाँद रहता है मैं इंतज़ार लुक छुप चाँद का करूँ क्यों ~ मनीष शर्मा
आज उसका, कल मेरा
देकर मुझे उक़ूबत, लुत्फ़ बहुत मिलता है उसे वक़्त, वक़्त की बात है, आज उसका, कल मेरा ~ मनीष शर्मा
