Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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हमने उसे गुज़ारा है
तुमने जिसे जिया है हमने उसे गुज़ारा है तुम उसे ज़िंदगी कहते हो और हम बोझ ~ मनीष शर्मा
मुलाज़मत व्यक्ति को घमंडी बनाती है
मुलाज़मत व्यक्ति को घमंडी बनाती है किन्तु व्यापार विनम्र और स्वाभिमानी ~ मनीष शर्मा
चंद ग़लतियों की
चंद ग़लतियों की, सख़्त सज़ा मिली मुझे गुनहग़ार थे जो बारहां, बाइज़्ज़त बरी हुए ~ मनीष शर्मा
भीतर तक कचोटती हैं वो सज़ायें
भीतर तक कचोटती हैं वो सज़ायें जो बिन गुनाह किये मिलती हैं हमें ~ मनीष शर्मा
मेरी रातें अब तन्हा नहीं
मेरी रातें अब तन्हा नहीं तेरे ख़्वाबों के काफ़िले गुज़रते हैं अब मेरी नींदों में ~ मनीष शर्मा
सभी जानते हैं
सभी जानते हैं कि सही और ग़लत में फ़र्क़ है क्या ना जाने क्यों फिर भी सभी ग़लत होना चाहते हैं ~ मनीष शर्मा
