Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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कोई भेद ना खोलो
रिश्ते गिरगिट हैं ज़रूर संग बदलेंगें टूट जाने के बाद कोई भेद ना खोलो बेहतर है चुप ही रह लो कल सरे आम ना हो जाओ तुम ~ मनीष शर्मा
इश्क के सफ़र की
जहाँ से चला मैं, वहीँ पर आ के रुका इश्क के सफ़र की, मंज़िल नहीं होती ~ मनीष शर्मा
तेरी बज़्म में
ख़्यालों से ख़ाली होकर के लौटा हूँ मैं फिर कोई रात ना गुज़रे तेरी बज़्म में ~ मनीष शर्मा
प्रेम ओ सूकूँ है
ख़्वाहिशों के पीछे तो ये जिस्म भागता रहा ताउम्र रूह की आरज़ू तो प्रेम ओ सूकूँ है आज भी ~ मनीष शर्मा
जिस दिन मैं कुछ नया नहीं सीखता
जिस दिन मैं कोई क़िताब नहीं पढ़ताजिस दिन मैं कुछ नया नहीं सीखताहोता है वो दिन बहुत ज़्यादा मनहूसउस दिन को मैं दिन भी नहीं गिनता ~ मनीष शर्मा
जीवन है खेला
जीवन है खेला, हम तुम खिलौने आज जो खेला, कल उसी ने तोड़ा ख़्वाबों में महल, हक़ीकत में झुग्गी ख़ामख़्वाह, बेमुकाम ख़ानाबदौश सफ़र ~ मनीष शर्मा
