Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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इश्क़ की गर्दन झुक गई
बात फ़कत दो दिलों की थी, सौ मुँह बातें बन गई नफ़रतों से भरे शहर में, इश्क़ की गर्दन झुक गई ~ मनीष शर्मा
कोई किसी के दर्द को
कोई किसी के दर्द को, तब तक महसूस नहीं कर पाता जब तक कि व्यक्ति ख़ुद, दर्द से रूबरू नहीं हो जाता ~ मनीष शर्मा
दर्शन झरोखों से
तुम किंवाड़ खोलो तो भीतर आऐं दर्शन झरोखों से अब ख़लता है हमें ~ मनीष शर्मा
मेरा इश्क़ साइनाइट से कम नहीं
मत कर मुझसे इतनी मुहब्बत मेरा इश्क़ साइनाइट से कम नहीं ~ मनीष शर्मा
मेरे दामन पर
मेरे दामन पर वही आदमी कीचड़ फेंके जिसका ख़ुद का दामन दूध से धुला हो ~ मनीष शर्मा
ये दिल भी ढूँढ रहा है इक लिबास
जिस्म के जख़्मों को छिपा लिया, लिबास की आड़ में ये दिल भी ढूँढ रहा है इक लिबास, किस बाज़ार में लाऊँ ~ मनीष शर्मा
