Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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वो चैन से भूखे सो गये
वो चैन से भूखे सो गये, काला आसमान ओढ़कर के हम तुम खा पीकर के भी, करवटें बदलते हैं रात भर ~ मनीष शर्मा
तुम पहचान भी लो मुझे
बेशक तुम अच्छे से जानती हो मुझे लेकिन ख़्वाहिश हैं मेरी कि किसी रोज़ बहुत अच्छे से तुम पहचान भी लो मुझे ~ मनीष शर्मा
तुम्हें ऐतराज़ क्यों
तुमने इबादत के लिए, बहुत सारे रब चुन लिये मैं सजदा सिर्फ यार का करूँ, तुम्हें ऐतराज़ क्यों ? ~ मनीष शर्मा
ऐ मनीष तू कैसे ग़म भुलायेगा
मयखानों में रोज़ मय मशरूब कर अपने ग़म भुलाते हैं मय – नोश ऐ “मनीष” तू कैसे ग़म भुलायेगा, तू मय को लबों से छूता जो नहीं ~ मनीष शर्मा
दिशा ही दशा
गर बिगड़े तो दुर्दशा, गर सुधरे तो कहकशाँ समझें सब ये बात ज़रा सी, दिशा ही दशा ~ मनीष शर्मा
बहुत सी बातें
बहुत सी बातें उम्रों के दरम्यां फ़ासलों में दफ़न हो जाती हैं काश ये उम्र ना होती और मैं वो कह पाता जो तुम सुनना चाहती हो ~ मनीष शर्मा
