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    चलो चलें उन बस्तियों में दीप जलाने जहाँ के दिये दीपावली पर भी अंधियारा फैलाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में रंग भरने जहाँ के आँगन बेरंग सूने रह जाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में पटाखे बांटने जहाँ के बच्चे दीपावली पर फटे अख़बार जलाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में जहाँ के लोग…

  • क्यों तुम शरमाती हो

    दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती होपास आने पर मेरेक्यों चुप हो जाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होदूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होपास आने पर मेरेक्यों तुम घबराती हो दूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होदूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होपास आने पर…

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    पिता है वृक्ष

    मैं भटकता पंछी, पिता है वृक्ष साया दे, छायाँ दे, संरक्षण दे साध सकूँ मैं अपना हर लक्ष्य पिता मेरे धनुष को वो बाण दे निराशा के तमस को दूर कर मुझे नित नई रोशनी का प्राण दे मैं भटकता पंछी, पिता है वृक्ष साया दे, छायाँ दे, संरक्षण दे ~ मनीष शर्मा

  • आओ नववर्ष पर नव संकल्प करें हम

    गतवर्ष ने मूँदे नयन नववर्ष ने खोले नयन गतवर्ष में थी कुछ ख़ुशियाँ और थे चुटकी भर कुछ ग़म ख़ुशियों से भर ली हमने झोली ग़मों की जला दी हमने होली आज क्षितिज पर हर्ष है उल्लास है नववर्ष का का महारास हैं आज नभ पर भी हर्ष है उल्लास है नववर्ष का का महारास…

  • मनभावन होली

    उड़े गुलाल चहुमुखी सतरंगी, पचरंगी सारे जहाँ को अपने रंग से रंगती लाल-गुलाबी, पीले-नीले रंगो की फुहार खुशी उल्लास से भरी मनरंगी बहार जन-जन के मन में प्यार का रंग भर दे हर एक के मन को उमंग के रंग से भर दे फिज़ाओं में मदमस्त रंगों का नशा फैले फूलों संग कलियाँ भी खूशबू…

  • जीने के लिये चंद साँसें चाहिये

    किसी को ज़मीन चाहिये तो किसी को आसमान चाहिये किसी को दौलत चाहिये तो किसी को शौहरत चाहिये किसी को युद्ध चाहिये तो किसी को नफ़रत चाहिये किसी को राजनीति चाहिये तो किसी को आरक्षण चाहिये उस शख़्श से पूछो ज़िंदगी के मायने जिसे पेट भरने के लिये एक सूखी रोटी चाहिये उस शख़्श से…

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