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    मदर्स डे 11.05.2013 केअवसरपरमेरीएकमौलिककृतिकविता (‘‘माँ‘‘) सरल शब्दों में आपके समक्ष रख रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आयेगी।   ‘‘माँ‘‘ जिन्दगी है मेरी ‘‘माँ‘‘ दुनिया है मेरी मुझे झूला झुलाती हैं माँ खुद आँखों में लिए नींद रात बिताती हैं माँ खुद गीले में सोती है मुझे सूखे पे सुलाती हैं माँ खुद भूखी रह जाती हैं मेरा…

  • दर्द लिखने की आदत

    दर्द लिखने की आदत सी हो गई है मुझे दिल के ज़ख्म नासूर जो बन चुके हैं मेरे कागज़ भी अब ज़ख़्मी नज़र आने लगा है क़लम भी रक्त की स्याही से जो भरी है मेरे जिसे ज़माना बादलों की गर्जना कहता है वो आहों के कराहने की आवाज़ हैं मेरे हज़ारों तोहमतें लगा दो…

  • “पापा”

    फादर्स डे 16.06.2013 केअवसरपरमेरीएकमौलिककृतिकविता (पापा) सरल शब्दों में आपके समक्ष रख रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आयेगी। पापा जब मैं लड़खड़ाता गिरता उठता चलने में अपनी अंगुली पकड़ाकर मुझे सम्भाला आपने पापा मुझे ज्ञान ना था सही गलत का बचपन में बचपन का बोध कराकर सही राह दिखाई आपने कभी अच्छा जो किया मैंने तो प्यार भी…

  • नारी तू शक्ति है

    जाने कितने युग है बीते जाने कितनी सदियाँ हर इक युग है तेरी गाथा हर इक सदी बस तेरी माया तेरा वर्चस्व तू ही है दूजा ना कोई ओर तेरे आगे नतमस्तक है दिशायें भी चारों ओर जितनी शीतलता है तुझमें उतनी भीष्ण उष्णता जितनी ख़ामोशी है तुझमें उतनी क्रोधाग्नि की ज्वाला जितना दर्द तू…

  • आओ खेलें होली

    रंजोग़म भुलाकर छलक रहे हैं रंग सारे प्यारे प्यारे खुशियों से लबालब छलक रहे है रंग सारे प्यारे प्यारे मस्ती में सराबोर है आलम सारा अलहदा सा है अल्हड़ अन्दाज़ न्यारा फ़िज़ा में जो रंग है इस मर्तबा ऐसा पहले ना था घटा में जो उमंग है इस मर्तबा ऐसा पहले ना थी आओ भर…

  • क्यों तुम शरमाती हो

    दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती होपास आने पर मेरेक्यों चुप हो जाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होदूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होपास आने पर मेरेक्यों तुम घबराती हो दूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होदूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होपास आने पर…

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