आओ कुछ मशालें खरीद लें
~ मनीष शर्मा
~ मनीष शर्मा
Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
फादर्स डे 16.06.2013 केअवसरपरमेरीएकमौलिककृतिकविता (पापा) सरल शब्दों में आपके समक्ष रख रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आयेगी। पापा जब मैं लड़खड़ाता गिरता उठता चलने में अपनी अंगुली पकड़ाकर मुझे सम्भाला आपने पापा मुझे ज्ञान ना था सही गलत का बचपन में बचपन का बोध कराकर सही राह दिखाई आपने कभी अच्छा जो किया मैंने तो प्यार भी…
ना जाने किस दिशा किस डगर जा रहा है हिंदुस्तान का बचपन पढ़ने लिखने की उम्र में गलियों कूचों का कचरा बीन रहा है बचपन तन पर कपड़े मैले कुचैले कंधो पे लादे फटे कट्टे लिए भविष्य ढूँढ रहा है बचपन बेचकर के कचरा कोड़ियों के दाम में बिक रहा है बचपन पैरों के तलवे…
चलो चलें उन बस्तियों में दीप जलाने जहाँ के दिये दीपावली पर भी अंधियारा फैलाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में रंग भरने जहाँ के आँगन बेरंग सूने रह जाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में पटाखे बांटने जहाँ के बच्चे दीपावली पर फटे अख़बार जलाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में जहाँ के लोग…
मैं भटकता पंछी, पिता है वृक्ष साया दे, छायाँ दे, संरक्षण दे साध सकूँ मैं अपना हर लक्ष्य पिता मेरे धनुष को वो बाण दे निराशा के तमस को दूर कर मुझे नित नई रोशनी का प्राण दे मैं भटकता पंछी, पिता है वृक्ष साया दे, छायाँ दे, संरक्षण दे ~ मनीष शर्मा
दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती होपास आने पर मेरेक्यों चुप हो जाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होदूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होपास आने पर मेरेक्यों तुम घबराती हो दूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होदूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होपास आने पर…
स्त्री हूँ मैं, स्त्री वात्सल्य से भरी गागर हूँ मैं ज्ञान से परिपूर्ण सागर हूँ मैं स्वभाव से चंचल नदी हूँ मैं काया से कोमल परी हूँ मैं प्रेम की बरखा हूँ मैं मोह का झरना हूँ मैं कड़ी धूप में छाँव हूँ मैं भरे शहर और गाँव हूँ मैं मेरे रूप स्वरूप हैं निराले…