आओ कुछ मशालें खरीद लें
~ मनीष शर्मा
~ मनीष शर्मा
Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
रंजोग़म भुलाकर छलक रहे हैं रंग सारे प्यारे प्यारे खुशियों से लबालब छलक रहे है रंग सारे प्यारे प्यारे मस्ती में सराबोर है आलम सारा अलहदा सा है अल्हड़ अन्दाज़ न्यारा फ़िज़ा में जो रंग है इस मर्तबा ऐसा पहले ना था घटा में जो उमंग है इस मर्तबा ऐसा पहले ना थी आओ भर…
ना जाने किस दिशा किस डगर जा रहा है हिंदुस्तान का बचपन पढ़ने लिखने की उम्र में गलियों कूचों का कचरा बीन रहा है बचपन तन पर कपड़े मैले कुचैले कंधो पे लादे फटे कट्टे लिए भविष्य ढूँढ रहा है बचपन बेचकर के कचरा कोड़ियों के दाम में बिक रहा है बचपन पैरों के तलवे…
चलो चलें उन बस्तियों में दीप जलाने जहाँ के दिये दीपावली पर भी अंधियारा फैलाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में रंग भरने जहाँ के आँगन बेरंग सूने रह जाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में पटाखे बांटने जहाँ के बच्चे दीपावली पर फटे अख़बार जलाते हैं चलो चलें उन बस्तियों में जहाँ के लोग…
होली के पर्व पर मेरी ये रचना सरहद पर मुस्तैद जवानों को समर्पित। किन रंगों को मैं उछालूँ ?क्या ? उन रंगों को मैं उछालूँजिन रंगों से माँ की ओढ़नी कोबन रंगरेज़ा नितदिन रंगा करता था किन रंगों को मैं उछालूँ ?क्या ? उन रंगों को मैं उछालूँजो बचपन में दोस्तों संगहोली में खेला करता…
मदर्स डे 11.05.2013 केअवसरपरमेरीएकमौलिककृतिकविता (‘‘माँ‘‘) सरल शब्दों में आपके समक्ष रख रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आयेगी। ‘‘माँ‘‘ जिन्दगी है मेरी ‘‘माँ‘‘ दुनिया है मेरी मुझे झूला झुलाती हैं माँ खुद आँखों में लिए नींद रात बिताती हैं माँ खुद गीले में सोती है मुझे सूखे पे सुलाती हैं माँ खुद भूखी रह जाती हैं मेरा…
जाने कितने युग है बीते जाने कितनी सदियाँ हर इक युग है तेरी गाथा हर इक सदी बस तेरी माया तेरा वर्चस्व तू ही है दूजा ना कोई ओर तेरे आगे नतमस्तक है दिशायें भी चारों ओर जितनी शीतलता है तुझमें उतनी भीष्ण उष्णता जितनी ख़ामोशी है तुझमें उतनी क्रोधाग्नि की ज्वाला जितना दर्द तू…