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  • तुम ही से हैं हम

    दाता ने दुनिया बनाई आदमी बनाये औरत बनाई प्यार बनाया क़ायनात बनाई ख़ुश रहने के लिए प्रकृति के अनुपम उपहार बनाये पर आदमी ने क्या किया धुंधले सपनों के भौंतिक साधन बनाये स्वार्थ के ऊँचे महल बनाये महल को उसने लोभ-लालच हिंसा-नफ़रत द्वेष-ईर्ष्या बलात्कार झूठ-मकार दोगले मुखोटों से अलंकृत किया भूल गया आदमी किसने उसे…

  • आओ कुछ मशालें खरीद लें

    आख़िर कब तक मोमबत्तियां लेकर यूँ ही सड़कों पर उतरेंगें आओ कुछ मशालें खरीद लें अस्मत के लुटरों को राख कर दें हम क्यूँ कुछ नहीं बदलता है क्या हमारी आँखों का पानी मर चुका है या सब कुछ मूक दर्शक की भाँति देख सहने की आदत डाल चुके हैं हम ख़ुद की सुरक्षा माँगना…

  • नारी तू शक्ति है

    जाने कितने युग है बीते जाने कितनी सदियाँ हर इक युग है तेरी गाथा हर इक सदी बस तेरी माया तेरा वर्चस्व तू ही है दूजा ना कोई ओर तेरे आगे नतमस्तक है दिशायें भी चारों ओर जितनी शीतलता है तुझमें उतनी भीष्ण उष्णता जितनी ख़ामोशी है तुझमें उतनी क्रोधाग्नि की ज्वाला जितना दर्द तू…

  • मनभावन होली

    उड़े गुलाल चहुमुखी सतरंगी, पचरंगी सारे जहाँ को अपने रंग से रंगती लाल-गुलाबी, पीले-नीले रंगो की फुहार खुशी उल्लास से भरी मनरंगी बहार जन-जन के मन में प्यार का रंग भर दे हर एक के मन को उमंग के रंग से भर दे फिज़ाओं में मदमस्त रंगों का नशा फैले फूलों संग कलियाँ भी खूशबू…

  • जीने के लिये चंद साँसें चाहिये

    किसी को ज़मीन चाहिये तो किसी को आसमान चाहिये किसी को दौलत चाहिये तो किसी को शौहरत चाहिये किसी को युद्ध चाहिये तो किसी को नफ़रत चाहिये किसी को राजनीति चाहिये तो किसी को आरक्षण चाहिये उस शख़्श से पूछो ज़िंदगी के मायने जिसे पेट भरने के लिये एक सूखी रोटी चाहिये उस शख़्श से…

  • बचपन

    ना जाने किस दिशा किस डगर जा रहा है हिंदुस्तान का बचपन पढ़ने लिखने की उम्र में गलियों कूचों का कचरा बीन रहा है बचपन तन पर कपड़े मैले कुचैले कंधो पे लादे फटे कट्टे लिए भविष्य ढूँढ रहा है बचपन बेचकर के कचरा कोड़ियों के दाम में बिक रहा है बचपन पैरों के तलवे…

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