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    उड़े गुलाल चहुमुखी सतरंगी, पचरंगी सारे जहाँ को अपने रंग से रंगती लाल-गुलाबी, पीले-नीले रंगो की फुहार खुशी उल्लास से भरी मनरंगी बहार जन-जन के मन में प्यार का रंग भर दे हर एक के मन को उमंग के रंग से भर दे फिज़ाओं में मदमस्त रंगों का नशा फैले फूलों संग कलियाँ भी खूशबू…

  • “पापा”

    फादर्स डे 16.06.2013 केअवसरपरमेरीएकमौलिककृतिकविता (पापा) सरल शब्दों में आपके समक्ष रख रहा हूँ, उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आयेगी। पापा जब मैं लड़खड़ाता गिरता उठता चलने में अपनी अंगुली पकड़ाकर मुझे सम्भाला आपने पापा मुझे ज्ञान ना था सही गलत का बचपन में बचपन का बोध कराकर सही राह दिखाई आपने कभी अच्छा जो किया मैंने तो प्यार भी…

  • बचपन

    ना जाने किस दिशा किस डगर जा रहा है हिंदुस्तान का बचपन पढ़ने लिखने की उम्र में गलियों कूचों का कचरा बीन रहा है बचपन तन पर कपड़े मैले कुचैले कंधो पे लादे फटे कट्टे लिए भविष्य ढूँढ रहा है बचपन बेचकर के कचरा कोड़ियों के दाम में बिक रहा है बचपन पैरों के तलवे…

  • क्यों तुम शरमाती हो

    दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ बड़बड़ाती होपास आने पर मेरेक्यों चुप हो जाती हो दूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होदूर से मुझको देखकर केकुछ इतराती होपास आने पर मेरेक्यों तुम घबराती हो दूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होदूर से मुझको देखकर केपलकें उठाती होपास आने पर…

  • स्त्री हूँ मैं, स्त्री

    स्त्री हूँ मैं, स्त्री वात्सल्य से भरी गागर हूँ मैं ज्ञान से परिपूर्ण सागर हूँ मैं स्वभाव से चंचल नदी हूँ मैं काया से कोमल परी हूँ मैं प्रेम की बरखा हूँ मैं मोह का झरना हूँ मैं कड़ी धूप में छाँव हूँ मैं भरे शहर और गाँव हूँ मैं मेरे रूप स्वरूप हैं निराले…

  • आओ नववर्ष पर नव संकल्प करें हम

    गतवर्ष ने मूँदे नयन नववर्ष ने खोले नयन गतवर्ष में थी कुछ ख़ुशियाँ और थे चुटकी भर कुछ ग़म ख़ुशियों से भर ली हमने झोली ग़मों की जला दी हमने होली आज क्षितिज पर हर्ष है उल्लास है नववर्ष का का महारास हैं आज नभ पर भी हर्ष है उल्लास है नववर्ष का का महारास…

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