Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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चुनाव आते हैं
ख़ास लोग भी, आम हो जाते हैंजब भी मुल्क में, चुनाव आते हैं ~ मनीष शर्मा
ऐसे जी रहा हूँ
ऐसे जी रहा हूँ, जैसे सदियों के लिए आया हूँ जहाँ में आरज़ी सी ज़िंदगी में, मैं मुस्तक़िल की ख़्वाहिश लिए ~ मनीष शर्मा
तुम यहाँ अकेले नहीं हो मनीष
ज़िंदगी के सताये तुम यहाँ अकेले नहीं हो “मनीष” जहाँ तक नज़र जाती हैं लोग बिलखते नज़र आते हैं ~ मनीष शर्मा
दिन हो या रात
दिन हो या रात मेरा साया अब मेरे साथ नहीं चलता ख़्वुरशेद और चराग़ों से दुश्मनी जो कर ली है मैंने ~ मनीष शर्मा
आख़िरी दुआ तुम ही हो
ख़ुदा भी बड़ा ख़ुदगर्ज़ समझता होगा मुझे क्योंकि मेरी पहली और आख़िरी दुआ तुम ही हो ~ मनीष शर्मा
ज़िंदगियाँ सिसक रही थीं
एक तरफ़ प्रतिस्पर्धा दौड़ रही थी पास ही मज़ार पर कुछ स्तब्ध ज़िंदगियाँ सिसक रही थीं ~ मनीष शर्मा
