Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
Similar Posts
तुम हो राधा, मैं कान्हा हूँ
चुराकर नीले आसमान से, धनक के सारे रंग लाया हूँ बदन तुम्हारा, रंग दूँ सारा, तुम हो राधा, मैं कान्हा हूँ ~ मनीष शर्मा
वैसे ही बाहर से दिखा करो
झूठी मुस्कुराहट लेकर, मुझसे ना मिला करो फ़र्ज़ी मीठी मीठी बातें, मुझसे ना किया करो कोफ़्त होती है मुझे, चिकनी चुपड़ी बातों से जैसे हो अंदर से, वैसे ही बाहर से दिखा करो। ~ मनीष शर्मा
दर्द सभी का एक सा
दर्द सभी का एक सा है रंज ओ ग़म ज़ुदा ज़ुदा ~ मनीष शर्मा
सर्द रात
सर्द रात चाँद की चाँदनी से ही ख़ुद को सेंक लेता हूँ जलता है जब बदन तो तेरी यादों के दरिया में डुबकी ले लेता हूँ ~ मनीष शर्मा
आज उसका, कल मेरा
देकर मुझे उक़ूबत, लुत्फ़ बहुत मिलता है उसे वक़्त, वक़्त की बात है, आज उसका, कल मेरा ~ मनीष शर्मा
सिर्फ तुम हो
इक ऐसा सवाल बना दो मुझे जिसका जवाब सिर्फ तुम हो ~ मनीष शर्मा
