Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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वो बावळे बनें
जो प्रेयसी/प्रेमी, प्रेम में हैं वो बावळे बनें, पागल नहीं ~ मनीष शर्मा
इंसानों से बेहतर
इंसानों से बेहतर तो एक घड़ी हैं जो मज़हब की दीवारें तोड़ती हैं अलार्म लफ़्ज़ को अक़्सर मैंनें अलाराम (अल्लाहराम) सुना हैं ~ मनीष शर्मा
ज़ाइक़ा नीम का
जिसकी ज़िंदगी में, कभी कोई आज़ार ना आयी उस शख़्स की ज़ुबाँ क्या जाने, ज़ाइक़ा नीम का ~ मनीष शर्मा
सात प्यारे रंगों से मिलकर के बनी हैं होली
सात प्यारे रंगों से मिलकर के बनी हैं होली ख़ुशियों से तू मेरी, मैं तेरी आ भर दें झोली ~ मनीष शर्मा
सबको जानते हैं
सब, सबको जानते हैं बस, पहचानते नहीं ~ मनीष शर्मा
जैसा बर्ताव तुम अपने लिए चाहते हो
जैसा बर्ताव, तुम अपने लिए चाहते हो मुझसे मैं चाहता हूँ वैसा ही बर्ताव, किया करो मुझसे ~ मनीष शर्मा
