Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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तुम्हारी इक मुस्कुराहट ने
तुम्हारी इक मुस्कुराहट ने फिर से ज़िंदा किया मुझे जीते जी मौत क्या है, जाना मैंने तुमसे बिछड़ जाने के बाद ~ मनीष शर्मा
अपना ख़ुदा कर लिया है
जब से तुमने नज़रें फेरी तब से ख़ुद को नज़रबंद कर लिया है मस्ज़िद का ख़ुदा रूठे तो रूठे अब तुम्हें अपना ख़ुदा कर लिया है ~ मनीष शर्मा
ज़िंदगियाँ सिसक रही थीं
एक तरफ़ प्रतिस्पर्धा दौड़ रही थी पास ही मज़ार पर कुछ स्तब्ध ज़िंदगियाँ सिसक रही थीं ~ मनीष शर्मा
मजबूर नहीं, मजबूत बनो
शुग़ल को अपना मसजूद चुनो मजबूर नहीं, मजबूत बनो ~ मनीष शर्मा
तुम्हारे चले जाने का मलाल
तुम्हारे चले जाने का मलाल भी भला कब तक तुम ज़िंदगी में तो थे मेरे पर ज़िंदगी शायद नहीं ~ मनीष शर्मा
नशे दा ज़ख़ीरा
सारा शहर मेनू इश्क़ दे नशे दा ज़ख़ीरा केंदा है डरदा हाँ, कित्थे तेनू मेरी लत न लग जेय ~ मनीष शर्मा

