Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
Similar Posts
मेरे दामन पर
मेरे दामन पर वही आदमी कीचड़ फेंके जिसका ख़ुद का दामन दूध से धुला हो ~ मनीष शर्मा
हम ना बदलें
वक़्त के साथ, सब कुछ बदल जाता है वक़्त बदले, हम ना बदलें, तो बात बने ~ मनीष शर्मा
जो सबक मुझे ज़माने ने
जो सबक मुझे ज़माने ने उलतफात सिखाया काश असातजा ने सिखाया होता मकतब में ~ मनीष शर्मा
उस मुक़ाम पर पहुँचना है मनीष
एक दिन तुम्हें उस मुक़ाम पर पहुँचना है “मनीष” जहाँ पे तेरा ग़लत भी, जहाँ को सही नज़र आये ~ मनीष शर्मा
बिखर जो रही है रोशनी
मिटा देगी ये दिवाली, तमस के सारे अँधेरे बिखर जो रही है रोशनी, हर एक दरीचे से ~ मनीष शर्मा
ज़माने के जाग जाने के बाद
मेरे इंतज़ार में रतजगे रूमानियत भरे नैन मेरे तुम आई मेहरम ज़माने के जाग जाने के बाद ~ मनीष शर्मा
