Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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दम घुटने लगा है
साँस ले रही है नफ़रतें अब खुली हवा में दम घुटने लगा है प्रेम का बंद कमरों में ~ मनीष शर्मा
कोई सलाह
कोई सलाह, कोई मशविरा रास ना आता, अब मेरे दिल को तुम्हारी आँखों में, ख़ुद को देख लेने के बाद ~ मनीष शर्मा
पन्ने नहीं पलटे
मुकद्दर की धूल झाड़ रहा हूँ कब से ख़ुदा ने इसके पन्ने नहीं पलटे ~ मनीष शर्मा
माँ ने मेरी झोली में वो सब डाल दिया
मैंने ख़ुदा की इबादत में, जब भी सिर झुकाकर कुछ माँगा “माँ” ने मेरी झोली में वो सब डाल दिया, जिसकी मुझे दरकार थी ~ मनीष शर्मा
वो इबादत सिर्फ़ यार की करे
किसी की तलाश हुस्न ओ जिस्म, तो किसी की इश्क जिसे हासिल हुए दोनों, वो इबादत सिर्फ़ यार की करे ~ मनीष शर्मा
इश्क़ की गर्दन झुक गई
बात फ़कत दो दिलों की थी, सौ मुँह बातें बन गई नफ़रतों से भरे शहर में, इश्क़ की गर्दन झुक गई ~ मनीष शर्मा
