Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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शराब शबाब और क़बाब
शराब, शबाब और क़बाबदिखे ये दुनिया इनकी दासमिलता है अगर लुत्फ़ इनसेतो पर्दानशीं क्यों है समाज ? ~ मनीष शर्मा
मुझे खिलौना बना देगी
या मौला तू मुझे हमेशा बच्चा ही रहने देना बड़ा हो गया तो दुनिया मुझे खिलौना बना देगी ~ मनीष शर्मा
अमीरी तो कभी
अमीरी तो कभी ख़्वाबों मे भी नहीं आती द्वंद तो फ़क़ीरी संग मूलभूत आवश्यकताओं से है यहाँ ~ मनीष शर्मा
काया की पीड़ा सबकी ज़ुदा
काया की पीड़ा सबकी ज़ुदा माया की पीड़ा सबकी एक माया की पीड़ा सबकी ज़ुदा काया की पीड़ा सबकी एक ~ मनीष शर्मा
ज़रूरतें जब बेवजह
ज़रूरतें जब बेवजह ख़्वाहिशों के लिबास पहन लेती है मुफ़लिसी मुक़द्दर बन इंसान को बे-लिबास कर देती है ~ मनीष शर्मा
ज़िंदगी है महाठगनी
ज़िंदगी है महाठगनी, छलावा है काया अब ना मोह बचा मुझमें ना ही माया भ्रम का पर्दा बड़ा ही रूपहला वा ना दिखता जो देखना चाहा ~ मनीष शर्मा
