Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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ये सिर्फ़ भ्रम का मायाजाल है
ज़मीं पर कामनाओं का दमन करो कामना दोज़ख का द्वार है दमन से सबको जन्नत अता होगी ये सिर्फ़ भ्रम का मायाजाल है ~ मनीष शर्मा
सूद हो किसी वैश्य का
इक दर्द घटता है तो दूजा बढ़ता है दर्द ना हुआ कोई सूद हो किसी वैश्य का ~ मनीष शर्मा
शराब शबाब और क़बाब
शराब, शबाब और क़बाबदिखे ये दुनिया इनकी दासमिलता है अगर लुत्फ़ इनसेतो पर्दानशीं क्यों है समाज ? ~ मनीष शर्मा
मैं दर्द ए दिल बयाँ
मैं दर्द ए दिल बयाँ, अश्क़ों से नहीं, लफ़्ज़ों से करता हूँ मैंने ज़माने को अश्क़ों पे हँसते, लफ़्ज़ों पे रोते देखा है ~ मनीष शर्मा
आओ तो फफ़ककर रो दें ज़रा
वो अश्क़, जो आँखों की कोर पर आकर ठहर गये थे इंतज़ार में है तुम्हारे, आओ तो फफ़ककर रो दें ज़रा ~ मनीष शर्मा
समंदर हो जाये
ग़मों ने अश्कों का रास्ता चुना है जापते रखना, सम थार गर समंदर हो जाये ~ मनीष शर्मा
