Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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तुम ही से हैं हम
दाता ने दुनिया बनाई आदमी बनाये औरत बनाई प्यार बनाया क़ायनात बनाई ख़ुश रहने के लिए प्रकृति के अनुपम उपहार बनाये पर आदमी ने क्या किया धुंधले सपनों के भौंतिक साधन बनाये स्वार्थ के ऊँचे महल बनाये महल को उसने लोभ-लालच हिंसा-नफ़रत द्वेष-ईर्ष्या बलात्कार झूठ-मकार दोगले मुखोटों से अलंकृत किया भूल गया आदमी किसने उसे…
वैसे जिया, जैसा चाहा
वे लोग बहुत ख़ुशनसीब हैं, जिन्होंने समझदार होने के बाद ज़िंदगी को ठीक वैसे मोड़ा, जैसा चाहा या ज़िंदगी को ठीक वैसे जिया, जैसा चाहा या ज़िंदगी ठीक वैसी मिली, जैसी चाही। ~ मनीष शर्मा
अग़र ज़िंदा हो तुम तो
अग़र ज़िंदा हो तुम तो अपने ज़िंदा होने का अहसास करवाते रहो क्योंकि अस्सी फीसदी लोग पैदा ही सिर्फ़ जनगणना के लिए होते हैं ~ मनीष शर्मा
ख़ुद को
ख़ुद को ख़ुद से बेहतरकोई नहीं जान सकता ~ मनीष शर्मा
जीत कोई नहीं छीन सकता
जीत कोई नहीं छीन सकता बस, मैदान नहीं छोड़ना है। ~ मनीष शर्मा
जीवन सरलता का मजमा है
जीवन सरलता का मजमा है इसे जटिलता से मत जियो ~ मनीष शर्मा

