मसलों का हल चाहता नहीं कोई
कोई भी मसला इतना बड़ा नहीं कि हल ना निकलेमसला तो ये है कि मसलों का हल चाहता नहीं कोई ~ मनीष शर्मा
कोई भी मसला इतना बड़ा नहीं कि हल ना निकलेमसला तो ये है कि मसलों का हल चाहता नहीं कोई ~ मनीष शर्मा
एक ही वक़्त में, एक ही ख़ुशी से अनेकों लोग ख़ुश होते हैं, हँसते हैं, झूमते हैं, नाचते हैं, जश्न मनाते हैं, उसी वक़्त में अनेकों लोग एक ही दुःख से दुःखी होते हैं, रोते हैं, टूटते हैं, बिखरते हैं, मातम मनाते हैं। ~ मनीष शर्मा
सोशल मीडिया के ग़लत और ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चे समय से पहले जवान, जवान समय से पहले बूढ़े और बूढ़े फिर से जवान हो रहे हैं। ~ मनीष शर्मा
वर्तमान समय में अगर ज्ञान को पद औरधन में ना बदला जा सके, तो ज्ञान व्यर्थ है। ~ मनीष शर्मा
दुनिया केवल उसी व्यक्ति को पहचानती हैजो व्यक्ति ख़ुद को बहुत अच्छे से जानता है ~ मनीष शर्मा
सोशियल मीडिया के इस युग में, इंसान की निजता (Privacy) और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है। ~ मनीष शर्मा
हम उन लोगों के प्रतिबिम्ब हैंजिन लोगों से हम प्रभावित हैं ~ मनीष शर्मा
जिस दिन मैं कोई क़िताब नहीं पढ़ताजिस दिन मैं कुछ नया नहीं सीखताहोता है वो दिन बहुत ज़्यादा मनहूसउस दिन को मैं दिन भी नहीं गिनता ~ मनीष शर्मा
इंसान के अच्छे बने रहने की केवल दो शर्तें हैं, पहली, व्यक्ति की संगत ज़िंदगीभर अच्छे लोगों के साथ रहे और अच्छे लोग नहीं ढूँढ पा रहा हो तो अकेला रहे। दूसरी, बुरे लोगों से कोई अहसान ना ले। ~ मनीष शर्मा
मैं अपनी ख़ल्वत में कोई भी ख़लल नहीं चाहताइसीलिए मैं किसी के भी बेहद क़रीब नहीं जाता ~ मनीष शर्मा