Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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स्नेह पायेगा या ईर्ष्या
व्यक्ति का व्यक्तित्व और उसका व्यवहार तय करता है कि सामने खड़े व्यक्ति से वो अपने लिए स्नेह पायेगा या ईर्ष्या। ~ मनीष शर्मा
हमारे व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं
हमारे द्वारा कहे गए लफ़्ज़ और लिखे गए शब्द, हमारे व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं। इनका सटीक इस्तेमाल ही ये तय करता है कि हम कितनी इज़्ज़त मिले जाने के हक़दार हैं। ~ मनीष शर्मा
निजता और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है
सोशियल मीडिया के इस युग में, इंसान की निजता (Privacy) और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है। ~ मनीष शर्मा
क़ाबिल बनना बहुत ज़रूरी है
क़ाबिल बनना बहुत ज़रूरी है क्योंकि वक़्त बदलने पर ये दुनिया तुम्हारी हैसियत पूछेगी, तुम्हारी ख़ैरियत नहीं ~ मनीष शर्मा
मैं दिलशाद रहूँ जीते जी हर हाल
ना तुम जीते जी याद रखना मुझेना याद रखना मुझे मरने के बादख़्वाहिश बस इतनी सी ही है मेरीमैं दिलशाद रहूँ जीते जी हर हाल ~ मनीष शर्मा
बिन अर्थ जीवन व्यर्थ
बिन अर्थ, जीवन व्यर्थ। ~ मनीष शर्मा

