Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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हर एक मसले की जड़ है ज़र
हर एक मसले की जड़ है ज़र ज़र हर एक मसले का हल भी बिना ज़र कोई किसी को ना पूछे मेयार बशर में हों चाहे कितने भी ~ मनीष शर्मा
दुनिया से मिलता हूँ
दुनिया से मिलता हूँ फ़र्ज़ी मुस्कुराहट के साथ खिलखिलाकर हंसनें की सारी वजहें तो तुम अपने साथ ले गयी ~ मनीष शर्मा
राह किनारे
सर्द रात हम दुबके सिहरते रहते हैं रजाई में और घरों में बेबसी बिन सिहरन नीला गगन ओढ़ सो जाती हैं राह किनारे ~ मनीष शर्मा
क़ाबिल कौन नहीं यहाँ
बात सिर्फ़ अवसर की है हासिल हो जाये तो वारे न्यारे ना हो तो संघर्ष करके भी हारें क़ाबिल कौन नहीं यहाँ तुम हो, मैं हूँ, हम सब हैं ~ मनीष शर्मा
वादों पर यक़ीन करना
मेरी आदत में हैं वादों पर यक़ीन करना तुम्हारी फ़ितरत में हैं वादों से मुकर जाना ~ मनीष शर्मा
पलकें झपक ना जाये कहीं
आँखों की कोर पर कुछ ख़्वाब रखे हैं मैंने डरता हूँ पलकें झपक ना जाये कहीं ~ मनीष शर्मा
