Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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क़ामयाबी का मूलमंत्र
क़ामयाबी का मूलमंत्र किताबों में छिपा है इन्हें मन से पढ़ियेगा क़ाबिल बनने के लिए ~ मनीष शर्मा
हम व्यक्तित्व से कैसे हैं
हमारे विचारों की अभिव्यक्ति अथवा किसी और के विचारों की अभिव्यक्ति के प्रति हमारी सहज सहमति, ये प्रदर्शित करती है कि हम व्यक्तित्व से कैसे हैं, कैसा सोचते हैं और हम किस विचारधारा वाले समाज से सम्बंध रखते हैं अर्थात हम किस प्रकार की विचारधारा वाले व्यक्ति हैं। ~ मनीष शर्मा
व्यवसायिक असफ़लता
“व्यक्ति की व्यवसायिक असफ़लता उसकी संतान के उज्ज्वल भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाती है।” ~ मनीष शर्मा
ये मनुष्य तय नहीं करता
प्रायः देखा गया है कि जीवन कैसे जीना है, ये मनुष्य तय नहीं करता। ये तय करता है वो समाज, जिसमें मनुष्य जन्म लेता है। ~ मनीष शर्मा
हम उन लोगों के प्रतिबिम्ब हैं
हम उन लोगों के प्रतिबिम्ब हैंजिन लोगों से हम प्रभावित हैं ~ मनीष शर्मा
फ़ैसले दूसरों के क्यों
जब ज़िंदगी पूर्णतया सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारी है तो फिर इस पर हक़ और फ़ैसले दूसरों के क्यों? ~ मनीष शर्मा

