Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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माँ ने मेरी झोली में वो सब डाल दिया
मैंने ख़ुदा की इबादत में, जब भी सिर झुकाकर कुछ माँगा “माँ” ने मेरी झोली में वो सब डाल दिया, जिसकी मुझे दरकार थी ~ मनीष शर्मा
एक ही ख़्वाब हर रात भी तो नहीं आता
कितने रोज़ याद रखोगे मुझको तुम मरने के बाद एक ही ख़्वाब हर रात भी तो नहीं आता नींदों में ~ मनीष शर्मा
अंधेरे पी गये
ख़्वाबों को जला जला कर के रोशनी कर रहा हूँ मेरी ज़िंदगी के सारे उजाले ये घने अंधेरे पी गये ~ मनीष शर्मा
शायर ज़रूर बन गया हूँ मैं
पाठ्यक्रम की किताबें, एक बार से ज़्यादा कभी पढ़ी नहीं मैंने तुझे सौ मर्तबा पढ़कर मेहरम, शायर ज़रूर बन गया हूँ मैं ~ मनीष शर्मा
तुम ना बदलना
भले ही बदले शहर की आब ओ हवा और मिज़ाज़ हम ना बदलेगें, तुम ना बदलना बदले चाहे उम्र के कितने भी पड़ावं ~ मनीष शर्मा
आज उसका, कल मेरा
देकर मुझे उक़ूबत, लुत्फ़ बहुत मिलता है उसे वक़्त, वक़्त की बात है, आज उसका, कल मेरा ~ मनीष शर्मा
