Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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साँसे चलने लगी
उम्मीदों के सहारे इक दफ़े फिर से साँसे चलने लगी ज़िंदगी के सारे बेहिसाब कर्ज़े धड़कन पर चढ़ने लगे ~ मनीष शर्मा
ये मैं कृष्ण से पूछ रहा हूँ
श्रीमद्भागवत गीता के भीतर उतरकर, ख़ुद को ढूँढ रहा हूँ कौन हूँ मैं, क्यूँ हूँ मैं, कहाँ हूँ मैं, ये मैं कृष्ण से पूछ रहा हूँ ~ मनीष शर्मा
वो इबादत सिर्फ़ यार की करे
किसी की तलाश हुस्न ओ जिस्म, तो किसी की इश्क जिसे हासिल हुए दोनों, वो इबादत सिर्फ़ यार की करे ~ मनीष शर्मा
ज़रूरतें जब बेवजह
ज़रूरतें जब बेवजह ख़्वाहिशों के लिबास पहन लेती है मुफ़लिसी मुक़द्दर बन इंसान को बे-लिबास कर देती है ~ मनीष शर्मा
पुख़्ता वजह ना हो
कोई भी किसी को तब तक याद नहीं रखता जब तक याद रखने की पुख़्ता वजह ना हो ~ मनीष शर्मा
ख़्वाबों को हक़ीक़त की शक़्ल
ख़्वाबों को हक़ीक़त की शक़्ल देने के लिए अब जागती आँखों से ख़्वाब देखता हूँ मैं ~ मनीष शर्मा
