कोई जगह नहीं हैं इस दुनिया में
प्रेम करने वाले कम, नफ़रत और हिंसाकरने वाले ज़्यादा हैं इस दुनिया मेंमेरे जैसे प्रेम में जीने मरने वालों के लिएकोई जगह नहीं हैं इस दुनिया में ~ मनीष शर्मा
प्रेम करने वाले कम, नफ़रत और हिंसाकरने वाले ज़्यादा हैं इस दुनिया मेंमेरे जैसे प्रेम में जीने मरने वालों के लिएकोई जगह नहीं हैं इस दुनिया में ~ मनीष शर्मा
दाता ने दुनिया बनाई आदमी बनाये औरत बनाई प्यार बनाया क़ायनात बनाई ख़ुश रहने के लिए प्रकृति के अनुपम उपहार बनाये पर आदमी ने क्या किया धुंधले सपनों के भौंतिक साधन बनाये स्वार्थ के ऊँचे महल बनाये महल को उसने लोभ-लालच हिंसा-नफ़रत द्वेष-ईर्ष्या बलात्कार झूठ-मकार दोगले मुखोटों से अलंकृत किया भूल गया आदमी किसने उसे…