हमारे व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं
हमारे द्वारा कहे गए लफ़्ज़ और लिखे गए शब्द, हमारे व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं। इनका सटीक इस्तेमाल ही ये तय करता है कि हम कितनी इज़्ज़त मिले जाने के हक़दार हैं। ~ मनीष शर्मा
हमारे द्वारा कहे गए लफ़्ज़ और लिखे गए शब्द, हमारे व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं। इनका सटीक इस्तेमाल ही ये तय करता है कि हम कितनी इज़्ज़त मिले जाने के हक़दार हैं। ~ मनीष शर्मा
सफ़ल होना आसान हो सकता है लेकिन सफ़लता को बनाये रखना बेहद मुश्किल ~ मनीष शर्मा
संघर्ष का अनुभव, जितना कड़वा होगा सफ़लता का स्वाद, उतना ही मीठा होगा ~ मनीष शर्मा
हमारे द्वारा किया गया रचनात्मक कार्य कुछ लोगों के दिल में घर करता है तो कुछ लोगों के दिमाग में घुसता है। जिनके दिल में घर करता है वे लोग हमसे और हमारे कार्य से हमेशा मोहब्ब्त करेंगे लेकिन हमारा कार्य जिन लोगों के दिमाग में घुसता है वे हमेशा द्वेष और ईर्ष्या रखेंगे। ~…
हम भीड़ में होंगे या भीड़ हमारे लिए होगी।” ये हमारे द्वारा सही दिशा में किये गये प्रयासों पर निर्भर करता है, इसलिए सकारात्मक होकर सदैव बड़े लक्ष्य का चयन करें। निश्चित तौर पर सफ़लता क़दम चूमेगी और मंज़िल बाहें फ़ैलाकर स्वागत करेगी। ~ मनीष शर्मा
बड़ी अजीब सी बात है कि व्यक्ति की शख्शियत, उसका रुतबा और धन की सम्पन्नता ये तय करती है कि उसके साथ अच्छा व्यवहार होगा या दुर्व्यवहार। ~ मनीष शर्मा
हम हमेशा उतना ही पाते हैं जितने हमारे प्रयास होते हैं ~ मनीष शर्मा
व्यक्ति का व्यक्तित्व और उसका व्यवहार तय करता है कि सामने खड़े व्यक्ति से वो अपने लिए स्नेह पायेगा या ईर्ष्या। ~ मनीष शर्मा
ज़िंदगी अवसर तो सभी को देती है कोई भुना देता है, कोई गंवा देता है ~ मनीष शर्मा
अकेलापन इंसान को या तो भगवान बना देता है या फिर शैतान। Loneliness either makes human being to god or devil. ~ मनीष शर्मा