Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
Similar Posts
वाक़िफ़ करवा दिया
ज़िंदगी से आहिस्ता आहिस्ता मुख़ातिब होने चला था मैं ज़माने ने मरने के सौ तरीक़ों से वाक़िफ़ करवा दिया ~ मनीष शर्मा
बेहद क़रीब नहीं जाता
मैं अपनी ख़ल्वत में कोई भी ख़लल नहीं चाहताइसीलिए मैं किसी के भी बेहद क़रीब नहीं जाता ~ मनीष शर्मा
बंजर वीराना बहार हुआ
बंजर वीराना बहार हुआ दश्त ए सहरा ख़ुशगवार हुआ जब से ज़िंदगी में दस्तक दी हैं तुमने ~ मनीष शर्मा
इक मुख़्तसर सी मुलाक़ात
इक मुख़्तसर सी मुलाक़ात हुई कभी ना बिछड़ने के कुछ वादे हुए इश्क़ में जीने मरने की कसमें खाई काश! ज़िंदगी वहीं थम गई होती ~ मनीष शर्मा
सात प्यारे रंगों से मिलकर के बनी हैं होली
सात प्यारे रंगों से मिलकर के बनी हैं होली ख़ुशियों से तू मेरी, मैं तेरी आ भर दें झोली ~ मनीष शर्मा
दम घुटने लगा है
साँस ले रही है नफ़रतें अब खुली हवा में दम घुटने लगा है प्रेम का बंद कमरों में ~ मनीष शर्मा
