Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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मैं सुलग रहा हूँ तेरे बिना
सर्द रातें लोग ठिठुर रहे हैं मैं सुलग रहा हूँ तेरे बिना ~ मनीष शर्मा
तुम ज़रूरतों की ही बात किया करो
ख़्वाहिशों की हर इक बात अब बेमानी सी लगती है तुम ज़रूरतों की ही बात किया करो हर बार मिलने पर ~ मनीष शर्मा
पक्की दोस्ती करते हैं
बिन माचिस लगी दुश्मनी की आग में इंसान ज़िंदा जला करते हैं क्या जायेगा साथ ओ बन्दे आ हम तुम पक्की दोस्ती करते हैं ~ मनीष शर्मा
इश्क़ करें या करें पढ़ाई
इश्क़ करें या करें पढ़ाई, युवाओं का बस यही सवाल हैपढ़ के ही इश्क़ लुत्फ़ देगा, बिन पढ़ाई ज़िंदगी ख़राब है ~ मनीष शर्मा
इंतिहा हुई
मैं अपना दिल, बारहा तुड़वाना चाहता हूँ इंतिहा हुई, इक बेवफ़ा पर लिखते-लिखते ~ मनीष शर्मा
शिक्षक ही हैं
विनम्र छात्र बनकर ज़िंदगी भर सीखेगा जोजीवन के उच्च शिखर पर ज़रूर पहुँचेगा वोकेवल शिक्षक ही हैं सबसे सच्चे पथप्रदर्शकजो बताते हैं हमें ज्ञान अर्जन के महत्व को ~ मनीष शर्मा
