Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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निजता और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है
सोशियल मीडिया के इस युग में, इंसान की निजता (Privacy) और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है। ~ मनीष शर्मा
मजबूर नहीं, मजबूत बनो
शुग़ल को अपना मसजूद चुनो मजबूर नहीं, मजबूत बनो ~ मनीष शर्मा
ज़रूरतें जब बेवजह
ज़रूरतें जब बेवजह ख़्वाहिशों के लिबास पहन लेती है मुफ़लिसी मुक़द्दर बन इंसान को बे-लिबास कर देती है ~ मनीष शर्मा
एक ही वक़्त में
एक ही वक़्त में, एक ही ख़ुशी से अनेकों लोग ख़ुश होते हैं, हँसते हैं, झूमते हैं, नाचते हैं, जश्न मनाते हैं, उसी वक़्त में अनेकों लोग एक ही दुःख से दुःखी होते हैं, रोते हैं, टूटते हैं, बिखरते हैं, मातम मनाते हैं। ~ मनीष शर्मा
अपना रूतबा
अपना रूतबा, क़द इतना ऊँचा कर लो कि दुनिया हमें ही फ़लक समझने लगे ~ मनीष शर्मा
वे हमेशा द्वेष और ईर्ष्या रखेंगे
हमारे द्वारा किया गया रचनात्मक कार्य कुछ लोगों के दिल में घर करता है तो कुछ लोगों के दिमाग में घुसता है। जिनके दिल में घर करता है वे लोग हमसे और हमारे कार्य से हमेशा मोहब्ब्त करेंगे लेकिन हमारा कार्य जिन लोगों के दिमाग में घुसता है वे हमेशा द्वेष और ईर्ष्या रखेंगे। ~…

