Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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उम्र तमाम हुए जा रही है
हर राह पर भटकते हुएसुबह से शाम हुए जा रही हैबेहतरीन की तलाश मेंउम्र तमाम हुए जा रही है ~ मनीष शर्मा
मर्दों ने अपनी जिस्मानी और ज़ेहनी कमज़ोरियों को छिपाने की ख़ातिर
मर्दों ने अपनी जिस्मानी और ज़ेहनी कमज़ोरियों को छिपाने की ख़ातिर, खेल रचाया बड़ा ही शातिरख़ुद को किया नुमायाँ कहकर सूरमा और पहलवान, औरतों को दिया पर्दा बताया नाज़ुक और नाज़नीन ~ मनीष शर्मा
ईश्वर की सबसे सुंदरतम कृति
ईश्वर की सबसे सुंदरतम कृतिस्त्री, आत्मिक प्रेम और प्रकृति ~ मनीष शर्मा
जब तक ओहदा
जब तक ओहदा और सामर्थ्य होगा तब तक गुरेज़ परवान चढ़ा होगा जिस दिन ओहदा गया, सामर्थ्य गया सारा गुमेज़ ओंधे मुँह पड़ा नज़र आयेगा ~ मनीष शर्मा
अपना रूतबा
अपना रूतबा, क़द इतना ऊँचा कर लो कि दुनिया हमें ही फ़लक समझने लगे ~ मनीष शर्मा
अग़र ज़िंदा हो तुम तो
अग़र ज़िंदा हो तुम तो अपने ज़िंदा होने का अहसास करवाते रहो क्योंकि अस्सी फीसदी लोग पैदा ही सिर्फ़ जनगणना के लिए होते हैं ~ मनीष शर्मा

