Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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हौंसला दिया
यहाँ कुछ लोग ज़मीन पर संभलने नहीं देते वो कौन लोग थे जिन्होंने कुछ लोगों को चाँद, मंगल पर संभलने का हौंसला दिया ~ मनीष शर्मा
निजता और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है
सोशियल मीडिया के इस युग में, इंसान की निजता (Privacy) और आबरू के अलावा सब कुछ सुरक्षित है। ~ मनीष शर्मा
जब तक ओहदा
जब तक ओहदा और सामर्थ्य होगा तब तक गुरेज़ परवान चढ़ा होगा जिस दिन ओहदा गया, सामर्थ्य गया सारा गुमेज़ ओंधे मुँह पड़ा नज़र आयेगा ~ मनीष शर्मा
दिशा ही दशा
गर बिगड़े तो दुर्दशा, गर सुधरे तो कहकशाँ समझें सब ये बात ज़रा सी, दिशा ही दशा ~ मनीष शर्मा
हर ग़लती हम ही ना करें
हमें ग़लतियों से सबक लेना चाहिए याद रहे, हर ग़लती हम ही ना करें। ~ मनीष शर्मा
ज़ुबाँ से तू ना खोल
दुनिया को हमारे बारे में केवल उतना ही ज्ञात होना चाहिए। जितना हम उन्हें बताते हैं। ज़रूरत से ज़्यादा हमारे बारे में अगर दुनिया जानती है या पता लगाती है तो हमारी निजता किसी दिन सरे आम हो सकती है। बंदे जब भी बोल, तोल-तोल के बोल, दिल में दबे राज़, ज़ुबाँ से तू ना…

