Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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ज़िंदगी की शाम
ज़िंदगी की शाम कब कहाँ और कैसे ढलेगी, कोई भी तो जाने ना कोई ठोकर खाकर संभल जाता है, कोई ज़िंदगी खोकर भी नहीं ~ मनीष शर्मा
वैसे जिया, जैसा चाहा
वे लोग बहुत ख़ुशनसीब हैं, जिन्होंने समझदार होने के बाद ज़िंदगी को ठीक वैसे मोड़ा, जैसा चाहा या ज़िंदगी को ठीक वैसे जिया, जैसा चाहा या ज़िंदगी ठीक वैसी मिली, जैसी चाही। ~ मनीष शर्मा
आज तुम लोग भी हमारे साथ चाँद पर होते
भारत ऐसा पहला देश है जिसने चाँद की धरती के दक्षिणी ध्रुव पर क़दम रखा है। ये सफ़लता भारत ने 23 अगस्त 2023 को भारतीय समय के अनुसार 06:04 बजे हासिल की। इसरो द्वारा भेजे गए चंद्रयान 2 ने जहाँ अपने क़दम रखे थे उस स्थान को तिरंगा के नाम से जाना जायेगा और चंद्रयान…
हत्या करने की मंशा रखने वाले लोगों
किसी की हत्या करने की मंशा रखने वाले लोगों का आत्महत्या कर लेना ही बेहतर। ~ मनीष शर्मा
सँवरने में पूरी उम्र खप जायेगी
ऐ बशर ख़ुद को कभी उजड़ने ना देना क्योंकि सँवरने में पूरी उम्र खप जायेगी ~ मनीष शर्मा
परवरिश का परिचायक है
व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके संस्कार और परवरिश का परिचायक है। ~ मनीष शर्मा

