Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
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तुम हो राधा, मैं कान्हा हूँ
चुराकर नीले आसमान से, धनक के सारे रंग लाया हूँ बदन तुम्हारा, रंग दूँ सारा, तुम हो राधा, मैं कान्हा हूँ ~ मनीष शर्मा
आख़िरी दुआ तुम ही हो
ख़ुदा भी बड़ा ख़ुदगर्ज़ समझता होगा मुझे क्योंकि मेरी पहली और आख़िरी दुआ तुम ही हो ~ मनीष शर्मा
कोई किसी के दर्द को
कोई किसी के दर्द को, तब तक महसूस नहीं कर पाता जब तक कि व्यक्ति ख़ुद, दर्द से रूबरू नहीं हो जाता ~ मनीष शर्मा
मेरी शिकस्त
मेरी शिकस्त मुक्कम्मल मंज़ूर है मुझे शर्त ये है कि जीत हर दफ़े सिर्फ तुम्हारी ही हो ~ मनीष शर्मा
नादाँ दिल को
दुनिया से की बग़ावत, तुम्हें पाने की ख़ातिर इश्क का आख़िरी हासिल अलगाव है बस इक यही बात समझ ना आई, नादाँ दिल को ~ मनीष शर्मा
हमारे लफ़्ज़
हमारे लफ़्ज़ हमारी शख़्सियत के आइने होते हैं इसलिए इन्हें एहतियातन ख़र्च करता हूँ मैं ~ मनीष शर्मा
