Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
Similar Posts
बंजर वीराना बहार हुआ
बंजर वीराना बहार हुआ दश्त ए सहरा ख़ुशगवार हुआ जब से ज़िंदगी में दस्तक दी हैं तुमने ~ मनीष शर्मा
मैंने दर्द के समंदर को
मैंने दर्द के समंदर को अपनी पलकों तले छिपा रखा है भीतर तूफाँ आये ग़म नहीं तुम तक एक बूँद ना छलकेगी ~ मनीष शर्मा
तुम्हारे चले जाने का मलाल
तुम्हारे चले जाने का मलाल भी भला कब तक तुम ज़िंदगी में तो थे मेरे पर ज़िंदगी शायद नहीं ~ मनीष शर्मा
तुझे भूल जाने की
मैं तेरे दिये ज़ख़्मों को कुरेदकर के ताज़ा कर लेता हूँ जब भी ये दिल ज़ुर्रत करता है तुझे भूल जाने की ~ मनीष शर्मा
क्या फर्क़ रह जायेगा
अक्सर सोचता हूँ क्यों ना बदल लूँ मैं भी अपनी फ़ितरत एकाएक ख़्याल रूकता है ज़हन में क्या फर्क़ रह जायेगा तुझमें और मुझमें ~ मनीष शर्मा
हम फ़ितरत से कैसे हैं
हम फ़ितरत से कैसे हैं ज़ुबाँ से ज़ाहिर किये जाने की ज़रूरत नहीं चलिए चार दिन साथ रहते हैं चार दिन काफी है हमारी फ़ितरत जानने को ~ मनीष शर्मा
