Counsellor | Writer | Poet | Lyricist | Composer | Singer.
JMFA 2017 Winner of the best lyricist.
Similar Posts
हौंसला दिया
यहाँ कुछ लोग ज़मीन पर संभलने नहीं देते वो कौन लोग थे जिन्होंने कुछ लोगों को चाँद, मंगल पर संभलने का हौंसला दिया ~ मनीष शर्मा
बिन अर्थ जीवन व्यर्थ
बिन अर्थ, जीवन व्यर्थ। ~ मनीष शर्मा
ख़ुद को
ख़ुद को ख़ुद से बेहतरकोई नहीं जान सकता ~ मनीष शर्मा
किताबों से रूबरू करवाकर नेक इंसान बना दो उन्हें
किताबों से रूबरू करवाकर नेक इंसान बना दो उन्हें जो कचरे के बेतहाशा ढेरों में अपने भविष्य को ढूँढ रहे हैं ~ मनीष शर्मा
ज़ुबाँ से तू ना खोल
दुनिया को हमारे बारे में केवल उतना ही ज्ञात होना चाहिए। जितना हम उन्हें बताते हैं। ज़रूरत से ज़्यादा हमारे बारे में अगर दुनिया जानती है या पता लगाती है तो हमारी निजता किसी दिन सरे आम हो सकती है। बंदे जब भी बोल, तोल-तोल के बोल, दिल में दबे राज़, ज़ुबाँ से तू ना…
कोई व्यक्ति अग़र ये सोचता है
कोई व्यक्ति अग़र ये सोचता है कि किसी का कोई काम नहीं करके उसने बहुत अच्छा किया है, तो वो ग़लत सोचता है। क्योंकि काम कभी भी किसी का नहीं रुकता। आसानी से किसी का काम कर देने से ज़िंदगी भर का श्रेय पाने के साथ साथ बहुत सारी दुआयें भी इंसान अपने नाम कर…
